The more you remember death,
the more you value life.
क्या विदेशों के पेड़ ज्यादा हरे और ज्यादा घने होते हैं ?
नहीं, पर वे ज्यादा उगाते हैं/उनका रक्षण ज्यादा करते हैं ।
गुणों का भी यही स्वभाव है – कुछ लोग ज्यादा उगा लेते हैं/उनकी रक्षा करते रहते हैं, कुछ समाप्त कर लेते हैं ।
चिंतन
समस्या आने पर न्याय नहीं, समाधान होना चाहिये;
क्योंकि…
न्याय में एक के घर दीप जलते हैं,
लेकिन
दूसरे के घर अँधेरा होता है ।
मगर समाधान में…
दोनों के घर दीप जलते हैं ।
(सुरेश)
( विंगकमांडर अभिनंदन के लौटने से भारत में तो दीपक जलेंगे ही,पाकिस्तान के प्रति द्वेष की अग्नि भी कम होगी )
क्या 2 रोटी खाने वाले से 10 रोटी खाने वाले का पुण्य ज्यादा होता है ?
नहीं, यदि 2 रोटी खाने वाला, 10 रोटी वाले से ज्यादा तृप्ति अनुभव कर रहा है तो उसके पुण्य ज्यादा है ।

(धर्मेन्द्र)
बचपन कैसे संजोकर रखें ?
सहज, सरल और निर्मल बन कर ।
कैसे बनें ?
सहज – स्वीकृति से,
अकृतिमताओं को कम करके – सरल,
धर्म/गुरु की शरण से निर्मल ।
3 प्रकार का – तामसिक – हर समय चिड़-चिड़ करते रहना,
राजसिक – अपना रौब बनाये रखने के लिये ,
सात्विक – सामने वाले की भलाई के लिये ,
इसमें प्रवृति बदल जाती है, समझाना भी आ जाता है ।
धर्मध्यान अग्रिम ज़मानत है,
इसीलिये घर से बाहर जाने से पहले देवदर्शन करके जाते हैं,
पापोदय होने पर विधानादि करते हैं ।
चिंतन
किसी व्यवसाय में खर्चा/परेशानी ज्यादा, कमाई /सुकून कम हो तो उसको बुरा कहोगे ना ?
संसार में भी सुख (सुखाभास) कम, दु:ख ज्यादा, इसलिये बुरा कहा ।
सबसे सरल तप – प्रसन्न रहना,
इससे पुण्यबंध होता है,
पापोदय शांत होता है,
तथा
कर्म झरते भी हैं ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
जो ज्येष्ठ बनने में लग जाते हैं, वे श्रेष्ठ नहीं बन पाते हैं ।
जो श्रेष्ठ बनने के प्रयास में लग जाते हैं, वे ज्येष्ठ भी बन जाते हैं ।
मुनि श्री विनिश्चयसागर जी

(सुरेश)
संसार में सबसे ज्यादा प्रेम स्वयं से होता है,
इसके कारण ही व्यक्ति संसार की ओर भागता है,
तथा
संसार से दूर भी भागता है,
यहाँ तक की कुछ लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं ।
जैसे भगवान, वैसा मैं – अभिमान आयेगा, प्रगति का भाव नहीं होगा ।
जैसी चींटी, वैसा मैं – हीनता का भाव आयेगा ।
“जैसा मैं, वैसा मैं”…क्यों ना कहें !
भगवान बनने के काम करें, चींटी बनने वाले कामों से बचें ।
चिंतन
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments