शिष्य के ऊपर कालिख लग जाये तो चलेगा,
पर कालिख लगा गुरु नहीं चलेगा,
वरना
शिष्य अपनी कालिख किस दर्पण में देखेगा !
ना ही शिष्य ऐसा काम करे कि गुरु के नाम पर कालिख लग जाये ।

मुनि श्री सुधासागर जी

कौन कहता है, ख़ामोशियाँ ख़ामोश होती हैं !

कभी ख़ामोशियों को, ख़ामोशी से सुनो
ख़ामोशियाँ वो कह देती हैं…
जिनकी लफ़्जों को तलाश होती है ।

???????? सुरेश ????????

हमारी आयु बढ़ नहीं रही, दिन प्रतिदिन घट रही है ।
फिर भी हम बच्चों की तरह सांसारिक वस्तुओं के लिये लड़ते रहते हैं ।
जबकि मालूम है कि – खिलौना पाने वाला बच्चा भी, सोने के बाद खिलौना छोड़कर ही सोता है ।

पूरी साल आराधना करना तो पढ़ाई है ।
पर जिस दिन आराधना ना हो पाये, उस दिन कितना अफसोस होता है/कितना प्रायश्चित लेता है, यह परीक्षा है ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

नदी और नाव का सम्बंध वात्सल्य है,
यदि नाव छिद्र रहित हो, तब नदी नाव को मंज़िल तक ले जाने में सहायक है ।
छिद्र सहित मोह है, नाव को डुबोने में निमित्त ।

कुटुम्ब दादाजी से नहीं, पिता पुत्र से चलता है ।
व्यापार को भी आगे चलाने के लिये नये नये Item लाये जाते हैं।

मुनि श्री सुधासागर जी

“भा” से भाव, “र” से राग, “त” से ताकत ।
जब कोई किसी को दास बनाता है, पहले उसका नाम बदलकर नया नाम रखता है, ताकि वह अपने को Meaningless मानने लगे जैसे भारत से India

श्री सदगुरु

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