1. आँसू आयें तो खुद पोछियेगा..
लोग पोछेंगे तो सौदा करेंगे ।
2. एक अच्छे इंसान की पहचान..
जिसके दोस्त और नौकर पुराने हो।
???????????? (डॉ.पी.एन.जैन) ????????????
कौन कहता है, ख़ामोशियाँ ख़ामोश होती हैं !
कभी ख़ामोशियों को, ख़ामोशी से सुनो
ख़ामोशियाँ वो कह देती हैं…
जिनकी लफ़्जों को तलाश होती है ।
???????? सुरेश ????????
हमारी आयु बढ़ नहीं रही, दिन प्रतिदिन घट रही है ।
फिर भी हम बच्चों की तरह सांसारिक वस्तुओं के लिये लड़ते रहते हैं ।
जबकि मालूम है कि – खिलौना पाने वाला बच्चा भी, सोने के बाद खिलौना छोड़कर ही सोता है ।
दरख्त़ों से ताल्लुक का हुनर कुछ सीख लो दोस्तों…
जड़ों में ज़ख्म लगते हैं…
तो टहनियां सूख जाती हैं…!
???????? सुरेश ????????
A business that makes nothing but money is a poor business.
पूरी साल आराधना करना तो पढ़ाई है ।
पर जिस दिन आराधना ना हो पाये, उस दिन कितना अफसोस होता है/कितना प्रायश्चित लेता है, यह परीक्षा है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
If I enjoy praise,
it means I can easily be hurt by defamation.
नदी और नाव का सम्बंध वात्सल्य है,
यदि नाव छिद्र रहित हो, तब नदी नाव को मंज़िल तक ले जाने में सहायक है ।
छिद्र सहित मोह है, नाव को डुबोने में निमित्त ।
कुटुम्ब दादाजी से नहीं, पिता पुत्र से चलता है ।
व्यापार को भी आगे चलाने के लिये नये नये Item लाये जाते हैं।
मुनि श्री सुधासागर जी
गुरूर में इंसान को कभी इंसान नहीं दिखता,
जैसे
छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही मकान नहीं दिखता…
(सुरेश)
आ + रति = सबसे रति,
विशेष अभिनंदन !
“भा” से भाव, “र” से राग, “त” से ताकत ।
जब कोई किसी को दास बनाता है, पहले उसका नाम बदलकर नया नाम रखता है, ताकि वह अपने को Meaningless मानने लगे जैसे भारत से India
श्री सदगुरु
श्रद्धा के दो भेद –
1. भावानात्मक झुकाव – संसार व परमार्थ दोनों में ।
2. प्रकट रूप को आदर्श मान हृदय में स्थापित, जिसे जीवन की डोर सोंप दें, प्राय: परमार्थ में ।
बीमारी में कई बार कहा जाता है कि कारण पता नहीं लग रहा,
उसे डॉक्टर की भाषा में Idiopathic(Idiot डॉक्टर, Pathic बीमार) कहते हैं ।
आप के दु:खों का कोई कारण ना हो तो उसे भी Idiopathic(Idiot कारण न समझने वाला, Pathic कर्मों से बीमार) कहेंगे ना !
पर बिना कारण के कार्य होता नहीं, सो दुःखों का कारण पूर्व के कर्म ही होंगे ना !!
डॉ.एस.एम.जैन
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