श्रावक के धन और तन रूपी दीपक में जब गुरु के मन और वचन रूपी घी और बाती आ जाती है, तब प्रकाश होता है/सामाजिक कार्यों की सिद्धी हो जाती है ।

मुनि श्री समयसागर जी

भक्ति क्यों नहीं हो पाती ?

क्योंकि हम पापों पर विश्वास करते हैं, पुण्य पर नहीं ।
श्री राम वनवास जाते समय प्रसन्न इसलिये थे कि उन्हें अपने पुण्यों पर विश्वास था ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जब कभी समस्या में होते हैं तो खूब हँसते/हंसाते हैं, जैसे सुदामा ने अपनी परेशानियाँ श्री कृष्ण को पूछने पर भी बतायीं नहीं थीं ।

मुनि श्री समयसागर जी

असाता/पापोदय की तपती धूप से भगवान रूपी घना वृक्ष स्वत: छाया देता है, मांगनी नहीं पड़ती है ।

क्षु. श्री गणेशप्रसाद जी वर्णी

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