भक्तों के द्वारा गुरु की पूजा करते समय गुरु को ध्यान से सुनना चाहिये ताकि अपने आपको उस योग्य बनाये रखने की प्रेरणा मिलती रहे, कमियों को ठीक करने का निमित्त मिलता रहे ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

भरत को सब ओर से दबाब ड़ाला गया कि वे अयोध्या की गद्दी पर बैठें – माँ, गुरू, राम सबने ।
भरत – मेरे भाग्य में गद्दी होती तो मैं बड़ा पुत्र क्यों नहीं होता !

मुनि श्री सुधासागर जी

1. हमारे पास सुख की कमी नहीं, पर हमें उसकी सुध नहीं ।
2. अज्ञानी पुण्य के उदय को सुख मानता है, ज्ञानी ज्ञान के उदय को ।
3. सुख का कारण पुण्योदय नहीं, पुण्योदय में अपनापन है ।

(धर्मेंद्र)

सांसारिक सुख की तासीर –

1. समय/मात्रा/संख्या के साथ घटता है ।
2. सुख देने वाली वस्तु से अलगाव अवश्यंभावी होता है ।
3. सुख का अंत दु:खमय होता है ।
4. सुख क्षणिक होता है ।

जबकि धर्म का सुख इनके विपरीत होता है ।

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April 8, 2022

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