अपने गुनाहों पर सौ पर्दे ड़ाल कर, हर शख्स कहता है – “ज़माना ख़राब है”

(जे.पी.शर्मा)

धर्म को विचार,
दर्शन को विश्वास,
और
आध्यात्म को आचरण कहते हैं ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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