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(Dr.Amit)
प्रतिभा का विकास, अनुकूल परिस्थिति में,
चारित्र का विषम, परिस्थितियों में ।
क्रिया शरीर से,
भाव मन से,
अभिप्राय उपयोग से ।
प्रवृत्ति में बदलाव – क्रियात्मक प्रगति,
वृत्ति में बदलाव – गुणात्मक प्रगति ।
अधर्म से बचना ही धर्म है ।
Grand father saw it in river,
Father saw it in well,
We saw in tap,
Our children see in bottle,
Where will our grand children see it !
Please SAVE water.
“गु” यानि अंधकार से,
“रु” यानि प्रकाश की ओर ले जाने वाले ।
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(Mrs.Sharma)
अच्छाई की ओट में ही बुराई पनपती है ।
गिरती हुई दीवार से हर कोई बचता है ।
इनसानियत गीली भूमि है ।
इस पर ही धर्म का अंकुर पनपता है ।
जो निशुल्क है, वही सबसे ज़्यादा क़ीमती है..
“नींद, शान्ति, आनंद, हवा, पानी, प्रकाश और सबसे ज़्यादा, हमारी साँसें” ।
(आर.के.गुप्ता)
शतरंज का एक नियम बहुत ही उमदा है –
चाल कोई भी चलो पर
अपने वालों को नहीं मार सकते…..
काश ये नियम इनसानों में भी होता…….
(सुरेश)
कभी फ़ुरसत में अपनी कमियों पर ग़ौर करना,
दूसरों के आईने बनने की ख्व़ाहिश मिट जायेगी ।
(सुरेश)
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