पुण्य हो तो तिनके का सहारा भी तार देता है ,
पापोदय में जहाज़ भी डुबा देता है ।

इच्छाओं के निरोध का पहला कदम है – दूसरों से अपेक्षा कम करते हुए, समाप्त करना ।
सरल को पहले tackle करना/गरम खिचड़ी के बाहर वाली पहले खाना ।

यदि दूसरों से अपेक्षा रखी, तो उपेक्षा के लिए तैयार रहें ।

ग्रह/नक्षत्र ऊर्जा पिंड़ हैं ।
इनकी गति से वातावरण के अवयवों की Chemistry बदलती रहती है ।
हमारे शरीर में भी वे ही अवयव हैं, सो हम पर भी प्रभाव पड़ता तो है पर पुरुषार्थ और पुण्य ज़्यादा प्रभावक होते हैं ।

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