2 प्रकार –

  • आराध्य – जो की पूज्यता के दायरे में आते हैं ।
  • इष्ट – जिनकी नित्य पूजा करते हैं ।
    संकट के समय इनका सहारा बहुत महत्त्वपूर्ण है ।

बुद्ध ने एक रोगी, वृद्ध और एक मृत को देखा और वे प्रबुद्ध हो गये,
हम रोज़ देखते हैं, हमें वैराग्य क्यों नहीं हो रहा है ?

क्योंकि वे बुध्द थे​ और हम बुद्धू हैं ।

मन का स्वभाव सकारात्मक है ।
उसे मना करोगे तो वह मानेगा नहीं, उसे बताओ कि उसे क्या करना है, वह करेगा ।
तब मन के माध्यम से इंद्रियों को भी नियंत्रित कर सकते हो ।

क्षु. श्री ध्यानसागर जी

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April 8, 2022

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