अंदाज़ कुछ अलग है मेरे सोचने का…
सबको मंज़िल की तमन्ना है,
मुझे रास्ते की ।
(श्रीमति शर्मा)
श्रेष्ठ कार्यकर्ता वह है,
जिसका कार्य तो दिखे पर कर्ता ना दिखे ।
(सुरेश)
बस इतनी सी बात समंदर को खल गयी,
एक कागज़ की नाव उस पर कैसे चल गयी !
(विनीता)
हाथ की लकीरें कितनी शातिर होती हैं !
मुठ्ठी में रहते हुए भी, मुठ्ठी में नहीं ।
(सुरेश)
ज़िंदगी का एक ही उसूल है-
यहाँ गिरना भी खुद होता है,
उठना भी खुद ।
(जे.पी.शर्मा)
चार जगह मनुष्य को अच्छे विचार आते हैं –
१) गर्भ में
२) बीमारी में
३) शमशान में
४) धर्म-श्रवण करते समय
यदि ये विचार स्थिर और दृढ हो जाए तो मानव भवबन्धन से मुक्त हो जाता है ।
(आर.के.गुप्ता)
इनमें धर्म-श्रवण लम्बे/हर समय प्राप्त हो सकता है ।
Life is a progress,
not a station.
(फ़िर नये स्टेशन आने पर खुशी किस बात की !
पिछले स्टेशनों के छूटने पर दु:ख किस बात का !!)
अपने बालों को और अपने वालों को उखाड़ कर फेंक देने वाला ही अपना कल्याण कर पाता है ।
(डा.अमित)
Residence of your worst enemy is…
between your two eyes.
मैं पैसा हूँ…
मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ;
मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ देता हूँ।
(ब्र.संजय)
Be grateful that
you don’t have everything you want,
It means you still have an opportunity
to be happier tomorrow than you are today.
(Ekata-Pune)
कुछ पाने के लिए….
कुछ खोना नहीं,
बल्कि….
कुछ करना पड़ता है ।
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