विज्ञान साधन देता है, धर्म साधना और साध्य ।
साधन, साध्य प्राप्त करने में सहायक की अहम भूमिका निभाता है ।

चिंतन

जीवन में अगर आपको आपके किये हुए कार्य का
श्रेय ना मिले तो चिंता मत करना,
क्योंकि आप उस दुनिया में रहते हैं..

जहाँ जलते तो तेल और बाती हैं पर लोग कहते हैं-“दीपक जल रहा है”…!

(डा.अमित)

किसी से अपने जैसे होने की
उम्मीद मत रखिये,
क्योंकि आप अपने सीधे हाथ में किसी का सीधा हाथ पकड़ कर कभी नहीं चल सकते ।

किसी के साथ चलने के लिए
अपने सीधे हाथ में उसका उल्टा
हाथ ही पकड़ना पड़ता है,
तभी साथ चला जा सकता है ।

(आर.के.गुप्ता)

व्यक्ति सोते से घबराकर उठा – “मेरे पेट पर से एक चूहा निकला”
मित्र – पर इसमें घबराने की क्या बात है ?
चूहा ही तो था !!
चूहे ने रास्ता बता दिया है । अभी चूहा निकला है, कल को हाथी निकलेगा ।

सत्य की भूख तो सबको होती ही है.
पर..
जब सत्य परोसा जाता है तो बहुत कम
लोगो को उसका स्वाद पसंद आता है।

यदि हमने अपने जीवन में सत्य-ज्योति हासिल कर ली है तो हमारा दायित्व है,कि हम उस पर संयम की एक चिमनी भी रख दें जिससे वह सच्चाई की ज्योति कभी बुझ नहीं पाए ।

– मुनि श्री क्षमासागरजी”

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