फ़्यूज़ उड़ने के अनेक कारण हो सकते हैं ।

पं श्री जगमोहनलाल जी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा – आपको वैराग्य कैसे हुआ ?

आचार्य श्री – आप लोगों के चेहरों को देख देख कर ।

मुनि श्री कुंथुसागर जी

इंग्लैंड में चाय पीते समय एक ब्रिटिश ने स्वामी विवेकानंद से कहा……
“सभी लोग कप से चाय पी रहे हैं और आप असभ्य की तरह प्लेट से पी रहे हैं”
स्वामीजी ने बहुत सुंदर जवाब दिया……
“इस समय यदि कोई और आ जाय तो आप की चाय झूंटी हो चुकी है, आप किसी से बांट नहीं सकते,पर मेरी चाय जो कप में है वो झूंटी नहीं है। मैं चाय के लिये उससे आग्रह कर सकता हूँ”
ये हमारी भारतीय सभ्यता हैं ।

(अन्जना-शिवपुरी)

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