स्वभाव मन से नहीं संगति से बनता है ।

शराब पीकर,जुआ खेल कर मरने की स्वतन्त्रता है,
भ्रष्टाचार खुलेआम स्वतन्त्र विचरण कर रहा है,
व्यभिचार को भी मौन स्वीकृति प्राप्त है।

पर अनादिकाल से चली आ रही धार्मिक क्रिया “समाधि-मरण” को स्वतन्त्रता
क्यों नहीं ?

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April 8, 2022

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