A Foreigner visited a Sadhu.
Sadhu was sitting on a mattress and was not having any thing else.
Foreigner – Where is your furniture ?
Sadhu – Where is your’s ?
I am a visitor.
I am too.

(Parul – Delhi)

शराब पीकर,जुआ खेल कर मरने की स्वतन्त्रता है,
भ्रष्टाचार खुलेआम स्वतन्त्र विचरण कर रहा है,
व्यभिचार को भी मौन स्वीकृति प्राप्त है।

पर अनादिकाल से चली आ रही धार्मिक क्रिया “समाधि-मरण” को स्वतन्त्रता
क्यों नहीं ?

ज़िन्दगी में खुद को कभी किसी इंसान का आदी मत बनाना…

क्यूंकि, इंसान बहुत खुदगर्ज़ है…

जब आपको पसंद करता है , आपकी बुराई भूल जाता है ;
और जब आपसे नफ़रत करता है , तो आपकी अच्छाई भूल जाता है…

(ड़ा. अमित)

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