किसी भी स्थिति का अंत तो उसके प्रारंभ में ही तय हो जाता है ।
महाभारत
यदि क्रोध आ ही जाये तो अपने आपको मत भूलो ।
ब्र. नीलेश भैया
Friendship is responsibility,
not opportunity.
दूसरों को अपना पुण्य फल दिया तो जा सकता है,
पर दूसरा ले तभी पायेगा, जब उसके पास अपने पुण्य हों ।
चिंतन
भक्ति, भगवान और भक्त के बीच दोनों को जोड़ने में, गोंद का काम करती है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
If you can learn from hard knocks,
why you can’t learn from soft touches !
सुख प्राप्त करने की वस्तु नहीं,
सुख वस्तु में है ही नही ।
यह तो पहचानने की चीज है ।
महाभारत
आदतें यदि समय रहते नहीं सुधारीं तो वे जरूरतें बन जाती हैं ।
ब्र. नीलेश भैया
झरने से पूछा समुद्र जितने बड़े क्यों नहीं बन जाते ?
झरना – मैं बड़ा होकर खारा नहीं बनना चाहता ।
(अरुणा)
Quote on 1st page of Preventive Medicine-
I keep six honest serving persons,
they taught me all I know.
Their names are-
What
Why
When
How
Where
Who
(Toshita)
बहन से पूछा – भाई कैसा चाहिए ?
रावण जैसा
क्यों ?
उसने अपनी बहन के लिये अपना राज्य दाँव पर लगा दिया ।
(शुची)
शरीर पूरा पवित्र नहीं हो सकता, फिर भी हम उसे पवित्र करने में लगे रहते हैं।
मन पवित्र हो सकता है, पर उसकी ओर हमारा ध्यान ही नहीं जाता ।
(ब्र. संजय)
Wise get more used to enemies,
than fools to friends.
पाँव सूखे पत्तों पर,
अदब से रखना,
धूप में माँगी थी तुमने
पनाह इनसे कभी।
(डा.मनीष)
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments