उलझे जो कभी मुझसे तो, आप सुलझा लेना;
रिश्ते का एक सिरा,
आपके हाथों में भी तो है..

???????? सुरेश ????????

पहले लोग भावुक होते थे,
रिश्ते निभाते थे,

फिर practical हुए,
रिश्तों से फायदा उठाने लगे,

अब professional हैं,
रिश्ते उनसे ही रखते हैं, जिनसे फायदा उठाया जा सके ।

(श्रीमती शर्मा)

जंगल कट रहा था, लेकिन फिर भी सारे पेड़ कुल्हाड़ी को ही वोट दे रहे थे,
क्योंकि पेड़ समझते थे कि कुल्हाड़ी में लगी हुई लकड़ी उनके समाज की है ।

(धर्मेन्द्र)

चमत्कार से चमत्कृत न हों,
सबसे बड़ा चमत्कार, नमस्कार से घटित होता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

एक रेत का कण, खीर का आनंद समाप्त,
एक छोटी सी दुर्गंध पूरे वातावरण को दूषित,
नीम का बीज भी कड़ुवा होता है ।
कषाय तो कर्मबंध का ही कारण होता है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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April 8, 2022

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