किसान दाना बोते समय भूसे की इच्छा नहीं, दाने* की ही भावना भाता है ;
भूसा** तो अपने आप मिल जाता है ।
भूसे की कामना तो जानवर करते हैं ।

मुनि श्री कुंथुसागर जी


*दाना = मोक्ष ,
**भूसा = सांसारिक सुख

भक्त ,सूर्य देव (जो बादल से ढके हुये थे) को जल चढ़ा रहा था।
सूरज तो दिख नहीं रहे ?
अभी नहीं दिख रहे, पर हैं तो !
आज न सही, कल ,कल न सही ,परसों दिख जायेंगे!!

चिंतन

इतिहास कहता है – भूत में सुख था,
विज्ञान का कहना है – भविष्य में सुख होगा,
धर्म का कहना – आज में सुख है।
आज का सुख, भूत और भविष्य को भी सुखी कर देगा।

श्रीमती सुनीति(चिंतन)

– “आज” में “आ” सुख को आमंत्रण देता है,
“ज” भूत को इंगित करता है।

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930