जब निर्जीव खरबूजा खरबूजे को देखकर रंग बदल सकता है, तो हम तो सजीव हैं तो अच्छी/बुरी संगति का असर हम पर नहीं होगा ?

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

पं. श्री दरबारीलाल जी कोठिया न्यायाचार्य के समाधिमरण के दौरान उन्होंने आचार्य श्री को बताया की शरीर बहुत तंग कर रहा है ।
आचार्य श्री – आप तो न्यायाचार्य हैं जो शरीर ने आपके साथ किया, वही आप उसके साथ कीजिये ।

मुनि श्री कुंथुसागर जी

जूना होने पर कपड़ा किसी और के काम का नहीं रहता ,
पर जो किसी के भी काम का नहीं रह जाता, वह अपने काम का हो जाता है ।

श्री लालमणी भाई

(जो दूसरों की कद्र करना जानते हैं वे वृद्धावस्था के अनुभवों को जूना बना कर अपने मैल साफ कर लेते हैं )

दु:खी होकर/अज्ञानता से शरीर छोड़ने के भाव से पापबंध,
मोक्ष सुख के लिये आनंद और ज्ञान सहित समाधिमरण करने से पुण्य/मोक्ष ।
क्रिया दोनों में एक ही है ।

चिंतन

Archives

Archives

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930