I am responsible for what I spoke.,
but not for what you understood.

(Ms. Namita – Surat)

लोभ जाग्रत कराने में आकर्षणता का भी सहयोग है । इसीलिये पहले समय में आकर्षक चीजों को ढ़ंककर सुरक्षा में रखते थे, आजकल प्रदर्शित करते हैं ।
पद्मनि का शीशे में किया गया प्रदर्शन, सबके मरने/जलने का कारण बना ।
प्रदर्शन में परिग्रह का आनंद है, जो दुर्गति का कारण भी है ।

चिंतन

सत्य की तलाश में एक ज़िज्ञासु गुरु के दरवाजे पर पहुँचा, खटखटाया ।

गुरु – कौन हो ?
शिष्य – इस प्रश्न के उत्तर की तलाश में ही तो आपके पास आया हूँ , रोजाना मंदिर जाता हूँ ।

ब्र. नीलेश भैया

सैकिंड़ की सुई – विचार
मिनिट की सुई – क्रियाऐं
घंटे की सुई – उन्नति (आत्मोन्नति)
सैल – आयु

सैल समाप्त होने से पहले आत्मोन्नति पूरी कर लो, वरना बार बार सैल बदलना पड़ेंगे/जन्म लेने पड़ेंगे ।

चिंतन

  • जो बुराई में आपका साथ दे वो आपका मित्र नहीं हो सकता ।
    किसी का साथ देना ही मित्रता का गुण नहीं है अपितु किसी को गलत कार्य करने से रोकना यह एक श्रेष्ठ मित्र का गुण है ।
  • सही काम में किसी का साथ दो ना दो यह अलग बात है मगर किसी के बुरे कार्यों में साथ देना यह अवश्य गलत बात है ।
    अगर आपके मित्र आपको गलत कार्यों से रोकते हैं तो समझ लेना आप दुनियाँ के खुशनसीब लोगों में से एक हैं ।
  • मित्र का अर्थ है कि जो आपके लिए भले ही रुचिकर ना हो मगर हितकर अवश्य हो।
    जिसे आपका वित्त प्यारा न हो, हित प्यारा हो समझ लेना वो आपका सच्चा मित्र है ।

(श्री अरविंद बड़जात्या)

सबसे ज्यादा संग्रह मनुष्य ही करता है,
चाहे वह चंदा हो या धन दौलत/परिग्रह ।
पाप/पुण्य का भी मनुष्य योनि में ही अधिकतम संग्रह होता है ।
ज्यादा बलवान/वैभवशाली सबसे अधिक करता है ।

चिंतन

खराब आचरण से खुद को नुकसान होता है ।
गलत ज्ञान से पूरे समाज को, क्योंकि ज्ञान दूसरों को परोसा जाता है ।

आचार्य श्री विभवसागर जी

बेईमानी का नकली सिक्का थोड़े दिन ही चलता है पर ईमानदारी की शक्ल में ही चलता है ।
देखा जाये तो ईमानदारी ही चलती है, बेईमानी नहीं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930