Entire water of the sea can’t sink a ship unless it gets inside the ship.

Similarly, negativity of the world can’t put you down unless you allow it to get inside you.

(Mr. Ravikant)

मैत्री भाव जगत में मेरा सब जीवों से नित्य रहे
दीन-दु:खी जीवों पर मेरे उरसे करुणा स्रोत बहे,
रहे भावना ऐसी मेरी, सरल-सत्य-व्यवहार करूँ
बने जहाँ तक इस जीवन में औरों का उपकार करूँ।

किसी का ये सोचकर साथ मत छोड़ना कि उसके पास कुछ नहीं है तुम्हें देने के लिये,
बस ये सोचकर साथ निभाना कि उसके पास कुछ नहीं तुम्हारे सिवा खोने के लिये ।

(श्री ब्रजेश)

क्रोध को तीव्रता के अनुसार पत्थर,मिट्टी,रेत,पानी की लकीरों से तुलना की गयी है।
लकीरों से तुलना क्यों ?
क्योंकि क्रोध प्रियजनों के बीच दरार डाल देता है।

पत्थर की लकीर लम्बे समय तक भी नहीं भरती,
मिट्टी की बरसात में भर जाती है,
कम क्रोध की तुलना रेत तथा पानी में खिंची लकीरों से दी है।

सस्ते से सस्ते मिट्टी के बर्तन के टूटने पर हम दुःखी हो जाते हैं,
पर छोटी से छोटी बात पर हम अपना जीवन नष्ट करने में नहीं हिचकते ।

क्या हमने अपने जीवन को मिट्टी के बर्तन से भी सस्ता तो नहीं बना लिया ?

कागज अपनी किस्मत से उड़्ता है (हवा चले तो ही उड़े), लेकिन पतंग अपनी काबिलियत से उड़ती है।

इसीलिये किस्मत साथ दे ना दे, काबलियत हमेशा साथ देती है ।

(श्री दीपक जैसवाल – ग्वालियर)

दुनियाँ में सबसे सस्ती चीज है सलाह, जो एक से मांगो तो हजारों से मिलती है ।
दुनियाँ में सबसे मंहगी चीज है सहयोग, जो हजारों से मांगो तो किसी एक से मिलता है ।

ध्यानरुपमं गुरुमुर्ति,                                                                                                                               पूजा मूलम् गुरु पदम्।
मंत्र मूलम् गुरु वाक्यं,                                                                                                                            मोक्ष मूलम् गुरु कृपा।।

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