Effort is never wasted even when it leads to disappointing results,
Because it always makes us stronger, more capable & more experienced.

(Mr. Deepak – Gwalior)

अपनी जितनी भावनायें हो, उतना हमें मिले ही, ऐसा नियम नहीं है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

(फिर वे भावनायें संसारिक हो या पारमार्थिक, मुख्यता है – मंद कषायी होने की ।

गिलास में मुठ्ठी भर नमक ड़ाल दो तो पिया नहीं जाता,
जबकि बड़े तालाब में ड़ालने से मिठास में कोई अंतर नहीं आता ।
यदि हम भी बड़े हो जाऐं तो ये छोटी मोटी निंदा आदि हमारे मीठेपन को नष्ट नहीं कर पायेगी ।

बड़े Shopping Mall के अंदर कोयले का व्यवसाय करने लगो तो हँसी के पात्र बनोगे,
टाल लेकर वही काम करो तो ठीक है।
मनुष्य पर्याय लेकर जानवरों की तरह व्यवहार करना बुद्धिमानी कैसे कहलायेगी ?

श्री रत्नत्रय -3

केटली में पानी जग से भरते हैं, पर निकलता टोंटी में से है, धीरे धीरे देर तक ।

(कर्मफल तो एक साथ बंधता है, पर फलित देर तक होता है ।)

आचार्य श्री विद्यासागर जी

सूर्य को सबसे ज्यादा महत्व वे लोग देते हैं, जो सूर्य के निकलने पर ही खाना पीना शुरू करते हैं और अस्त होने पर बंद कर देते हैं ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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