एक भक्त ने भगवान से कहा –
मैं आपसे मिलना चाहता हूँ ।
भगवान – जब चाहो मिल लो, मेरे दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं ।
भक्त – पर मैं आपको पहचानुंगा कैसे ?
भगवान – अपने आप को पहचान लो, बस मुझे पहचानने में दिक्कत नहीं आयेगी ।

(शशि)

किसी की सहायता करते समय सोचो – “यह उसका आखिरी दिन है”
ताकि अधिक से अधिक और मन से कर सको ।
सहायता करने के बाद सोचो – “यह मेरा आखिरी दिन है”
ताकि बदले में लेने का भाव ना आ जाये ।

चिंतन

नीति से चपरासी बनना भी मंज़ूर होना चाहिए, अनीति के साथ चक्रवर्ती बनना भी उचित नहीं ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930