शिष्य को गुरू कुछ देते नहीं हैं,
सिर्फ पहचानने की कला बता देते हैं ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

एक भक्त ने भगवान से कहा –
मैं आपसे मिलना चाहता हूँ ।
भगवान – जब चाहो मिल लो, मेरे दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं ।
भक्त – पर मैं आपको पहचानुंगा कैसे ?
भगवान – अपने आप को पहचान लो, बस मुझे पहचानने में दिक्कत नहीं आयेगी ।

(शशि)

किसी की सहायता करते समय सोचो – “यह उसका आखिरी दिन है”
ताकि अधिक से अधिक और मन से कर सको ।
सहायता करने के बाद सोचो – “यह मेरा आखिरी दिन है”
ताकि बदले में लेने का भाव ना आ जाये ।

चिंतन

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