कहते हैं – ऊंट एक तिनके के बोझ से बैठ जाता है ।

(वो तिनका, जिसके बाद वो और बोझा नहीं उठा पाता)

श्री सौरभ जैन – नोएड़ा

स्वर्ग/नरक जाने का फैसला, आखरी पुण्य/पाप क्रिया तय करती है ।

जो हमारे करीब हैं और रोज का मिलना जुलना है, उन्हें हमसे शिकायत बहुत हैं ,
जो हमसे दूर हैं और कभी कभी मिलना होता है, उन्हें हमसे कोई शिकायत नहीं ।

सो नज़दीकियों से अब हमें ड़र लगता है !!

(धर्मेंद्र )

ज़िंदगी भर एक ही भूल करते रहे,
दिल से रोये और चेहरे से हंसते रहे ।
चाह कर भी भूल सुधार नहीं पाये,
क्योंकि धूल थी चेहरे पर और आइना साफ करते रहे ।।

(श्री संजय)

(श्री आर. के. जैन के शिवपुरी collector का चार्ज संभालने पर )

1. Character वाला ही collector (जिलाधीश) बनता है ,
Characterless तो सिर्फ  collector (अपने लिये पैसे collect करने वाला) होते हैं |

श्री लालमणी भाई

2. कार्यप्रणाली वैसी जैसी श्री तुलसीदास जी ने कही –

“मुखिया मुख सौ चाहिये, खान पान में एक ।
पालै पोसे सकल अंग, तुलसी सहित विवेक ।।”

श्री जे. पी. पाठक

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