If the path is beautiful, first confirm where it leads…..
But, if the destination is beautiful, don’t bother how the path is……                                                           Keep walking…………

(Shri R.B. Garg)

दर्पण को जब गौण करोगे, तब अपना बिम्ब दिखेगा ।

बाह्य पदार्थों का महत्त्व जब कम करोगे, तब स्वानुभव होगा ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

दर्द हड़्ड़ी टूटने पर ज्यादा होता है या Dislocation में ?
शरीर का Damage किसमें ज्यादा होता है ?

दौनों में बराबर होता है ।

Dislocation – राग है, जो अपनी ओर खींचने से होता है ।
हड़्ड़ी टूटना – द्वेष है, जो धक्का मारने से टूटती है ।

चिंतन

कर बोले कर ही सुने, श्रवण सुने नहीं ताय ।
( एक हाथ जब दूसरे हाथ की नब्ज़ देखता है तब कान को भी आवाज़ नहीं आती है )

दान देते समय किसी को पता नहीं लगना चाहिये ।

श्री लालमणी भाई

नाव पानी पर चले तो ठीक,
पानी नाव में नहीं भरना चाहिये, वरना ड़ूब जायेगी ।

वैभव/संसार हमारे मन में न भर जाये, वरना हम भी ड़ूब जायेंगे ।

श्री चक्रेश भैया

अपने जीवन को व्यवस्थित करने के लिये Time Table बनाते हैं, इसे बंधन ना मानें ।
यह तो हमें अधिक Tensions के बंधनों से मुक्त करता है ।

छोटे छोटे बंधन हमें निर्बंध करने के लिये होते हैं ।

तेल उबल रहा हो, तो पानी के छींटे ड़ाल कर ठंड़ा करने की कोशिश कभी मत करना ।
तेल और उफनेगा और आपके ऊपर भी छींटे आऐंगे ।

जब सामने वाला गुस्से में हो तो कभी सलाह मत देना ।

चिंतन

वाहनों में आगे देखने के लिये बड़ी सी Screen रहती है,
पीछे देखने के लिये छोटा सा शीशा ।

(श्री एस. के. जैन )

Past का महत्त्व सिर्फ इतना है कि गतवर्ष में की गई गलतियों से सबक सीखें,                                ताकि वे Repeat ना हों ।
ज्यादा समय नववर्ष को संवारने में लगायें ।

नयन यानि ‘नय + न’,
यानि नयों के परे।
शांत, निर्विकल्प तथा सरल दृष्टि वाले ही ‘नयन’ होते हैं ।

(बाकि सब तो सिर्फ दिखने वाली आँखें हैं, नयन नहीं क्योंकि नयों के परे यानि दौनों आँखोँ या दृष्टियों से देखना, अनेकांत दृष्टि, एक आँख से देखना एकांत है । )

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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