नयन यानि ‘नय + न’,
यानि नयों के परे।
शांत, निर्विकल्प तथा सरल दृष्टि वाले ही ‘नयन’ होते हैं ।

(बाकि सब तो सिर्फ दिखने वाली आँखें हैं, नयन नहीं क्योंकि नयों के परे यानि दौनों आँखोँ या दृष्टियों से देखना, अनेकांत दृष्टि, एक आँख से देखना एकांत है । )

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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April 8, 2022

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