भक्ति/सत्संग में जब आनंद आना शुरू होता है,  तो पहले तो बोलना बंद हो जाता है और अंत में सुनना भी ।

श्री बी. पी. तनेजा जी

ड़ाक्टर के मृत घोषित करने के बाद भी एक मुहूर्त (48 Minute)तक Wait करना चाहिये ।
क्योंकि सारे बाह्य लक्षणों के समाप्त होने पर भी, कभी कभी शरीर जीवित होते हुये देखा जाता है ।

आजकल पुरूषार्थ व्यायाम करने वाली साइकिल जैसा है ,
चलाते चलाते, पसीना पसीना हो जाते हैं पर पहुंचते कहीं नहीं ।

मुनि श्री सौरभसागर जी

मज़बूरी से त्याग करने  में पुण्य कम मिलता है, त्याग तो मज़बूती से होना चाहिये ।

वृद्धावस्था में इच्छायें कम होने से पुण्य कम मिलेगा, युवावस्था में उन्हीं चीजों का त्याग करने से पुण्य ज्यादा ।

इस संसार को कैसे समझें कि यह मेरा नहीं है ?

जो आपका था ही नहीं, उसे सोच-सोच कर कि ये आपका है, अपना मानने लगे ।
तो जो वास्तव में आपका है ही नहीं, उसे यह सोच-सोच कर ही कि यह मेरा नहीं है, पराया Feel नहीं कर सकते हैं ?

चिंतन

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