10 बाह्य – क्षेत्र, वास्तु, धन, धान्य, द्विपद, चतुष्पद, यान, कुप्य (वस्त्र), भांड़ (बर्तन), शय्यासन ।
14 अंतरंग – मिथ्यात्व, 4 कषाय, 9 अकषाय ।

अभक्ष्य – 5 प्रकार के हैं ।
1. त्रसघात – द्विदल, अमर्यादित भोजन
2. बहुघात – जैसे आलू आदि
3. अनिष्ट – सेहत के लिये नुकसानदायक
4. अनुपसेव्य – मूत्र आदि
5. प्रमादकारक – अफीम आदि

आचार्य श्री एक बार किसी गरीब के घर आहार के लिये गये, रोटियों के बर्तन में 6 रोटियाँ थीं, उन्होंने 2 रोटी खाने के बाद अंजुली छोड़ दी । ताकि चौके वाले पति-पत्नि को उनके हिस्से की 2-2 रोटियाँ मिल सकें ।

दुश्मन ताकतवर हो तो हमला दोनों ओर से करें – बाहर से क्रियायें, अंदर से भी चिंतन आदि,
जैसे राजधानी (मन) में जासूस भेजे जाते हैं,

बाह्य और अंतरंग (जासूसों) में Communication Establish होना चाहिये वरना दुश्मन (अनादि संस्कार/कर्म) हारेगा नहीं,

राजधानी को जीतने के लिये, बाह्य छुटपुट किले जीतने से काम नहीं चलेगा ।

चिंतन

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