क्षमता कैसे बढ़ायें ? (युवा ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा। उस सभा में गृहस्थ, ब्रम्हचारी तथा मुनिगण भी थे)।
सो आचार्य श्री का एक उत्तर सबके लिये होना था।
आ. श्री –>
1. लोक-संपर्क से बचो।
(युवा की पढ़ाई सही होगी, गृहस्थ के घर की बात बाहर नहीं जायेगी, व्रतियों की साधना अवरुद्ध नहीं होगी)।
2. Over Working से बचो।
3. शिथिलता लाने वाले साधनों से बचो।

मुनि श्री विनम्रसागर जी

गिलास आधा भरा है या खाली, इस विवाद में क्यों पड़ें ! आधा भरने का पुरुषार्थ क्यों न करें !!
इसे कहते हैं → Adding life to your time, वरना भगवान को कोसते ही रहेंगे।
Happiness does not happen, you have to make it happen.
जीवन का समय तो नहीं बढ़ा सकते पर बचे हुए समय में खुशियाँ/ संतोष तो भर सकते हैं न !

गौर गोपालदास जी

चावल में से कंकड़ न निकालना अज्ञान है। घातक भी हो सकता है, क्योंकि दाँत टूट सकते हैं।
गुण को उपादेय मान कर ग्रहण करो। दोष को हेय मानकर तजना होगा।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

भविष्य बताने वाले सपने तो प्राय: महापुरुषों को ही आते हैं। साधारण लोगों के सपने तो मन के भावों/ स्वभाव पर ही आधारित होते हैं। भाव अनेक, इसलिये सपने भी भानुमती के पिटारे।
सो सपनों से अपनी पहचान कर सकते हैं; क्योंकि झूठ तो खुली आँख से ही होता है।

निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी

भगवान के चरण-चिह्न स्त्रियाँ छू सकती हैं, साधु के चरण क्यों नहीं ?

दादा जी का बहू लिहाज करतीं हैं, उनके फोटो का क्यों नहीं ?

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

संस्कार शिविरों के अनुभवों को तब तक याद रखें, जब तक उनसे ऊपर न उठ जाय (कई शिविरार्थी साधु बन गये जैसे मुनि श्री पूज्यसागर जी)।
कुएं में गिरे व्यक्ति को रस्सी तब तक पकड़े रखना चाहिये जब तक ऊपर न आ जाये।

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930