Month: April 2026
तीर्थंकरों की महिमा
तीर्थंकरों की महिमा…. श्री सोनागिर सिद्धक्षेत्र से मुनि नँगकुमार, अनँगकुमार जी मोक्ष गये। चन्द्रप्रभु भगवान का समवसरण आया। मूलनायक प्रतिमा चन्द्रप्रभु भगवान की ही है।
शिष्य / गुरु
आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा…. आप अपने को कैसा शिष्य मानते हैं ? सूखे पत्ते सा। वो कैसे ? सुखे पत्ते की अपनी कोई
अभिषेक
अभिषेक पांडुकशिला पर “श्री” लिखकर करना चाहिये। ताकि भगवान पर ढाया हुआ जल “श्री” को छूता हुआ आये। क्योंकि अभिषेक श्रावकों के द्वारा श्रावकों के
सकारात्मकता
वैज्ञानिक आइंस्टीन की सालों की मेहनत अचानक प्रयोगशाला में आग लगने से समाप्त हो गई। आइंस्टीन…. अच्छा हुआ मेरी गलतियाँ समाप्त हो गईं, अब नये
मीमांसा
दर्शन तीन प्रकार के – तत्त्व मीमांसा –> सृष्टि का निर्माण कैसे आदि। ज्ञान मीमांसा –> ज्ञान की सीमायें क्या हैं। आचार मीमांसा –> ये
संबंध
नदी/ सूरज हमसे संबंध बनाते नहीं, हम आगे बढ़कर बनाते हैं, प्यास बुझाने/ ताप लेने। भगवान/ गुरु से हमें ही Connect होना होगा। निर्यापक मुनि
समय
स्टेज पर दूसरे कार्यक्रमों की बहुलता तथा धर्मचर्चा के लिये समय बहुत कम रह जाने पर, आचार्य श्री विद्यासागर जी –> समय की कीमत करो,
शून्य
शून्य अंदर/ बाहर से खाली होता है। जिनका जीवन अंदर/ बाहर से खाली होता है, उनके जीवन में पूर्ण विराम लग जाता है। शून्य पूर्णता
भागदौड़
भागदौड़…. कुत्ता एक मिनट में 15 बार सांस लेता है, औसत आयु 10 वर्ष। कछुआ एक मिनट में 2 बार सांस लेता है, औसत आयु
धर्म / दान
आहार-दान धर्म है इसलिए देने तथा लेने वाले दोनों का धर्म बढ़ेगा। यदि साधु के पेट भरने का भाव आ जाए तो धर्म नहीं। ऐसे
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