Month: April 2026
कषायों की तीव्रता
किसी जीव का क्रोध अनंतानुबंधी का है, बाक़ी कषायें मंद दिखती हैं, पर बाकी कषायें भी आयेंगी मंद अनंतानुबंधी की श्रेणी में ही। क्योंकि कषायों
लाड़ / डाँट
लाड़ से खुशी सुरक्षित, डाँट से हित। इसीलिए गुरु शिष्य को डाँट लगाकर रखते हैं। आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे…. पर डाँट इतनी तगड़ी
विकथा
विकथा 4 नहीं, 15 होती हैं…. स्त्री, धन, भोजन, नदी पर्वत से घिरे स्थान/ केवल पर्वतों से घिरे स्थान, राज, चोर, देश-नगर, खान, नट, भाट,
बंध / अबंध
भगवान महावीर से उनके सबसे बड़े शिष्य गौतम जी ने पूछा… आप भी इस संसार में, मैं भी; पर आप अबद्ध (संसार/ कर्मों से), मैं
वैय्यावृत्त्य
आचार्य श्री भद्रबाहु जी की वैय्यावृत्त्य देवता भी करते थे। कैसे ? गर्मी/ प्यास ज्यादा होने पर बादल की छांव करके।
रूपी / मूर्तिक
1. आत्मा –> रुपी संसारी की, रुपी/ अरुपी केवलज्ञानी का विषय। अमूर्तिक(निश्चित आकार नहीं)। सिद्ध –> अरुपी, अमूर्तिक … केवलज्ञानी का विषय। 2. विषयभोग –>
इंद्रियों पर नियंत्रण
इंद्रियों पर नियंत्रण रखने के लिये मन को असंतुष्ट रखें। मीठा मन को अच्छा लगता, सो और-और मांगता है, जिव्हा नहीं। (असंतुष्ट मन बुझ आता
गर्भ कल्याणक
संस्कारों का महत्व बताने के लिए गर्भ-कल्याणक दो दिन मनाया जाता है। देवियाँ भगवान की माँ की सेवा में, गर्भ की रक्षा हेतु नहीं बल्कि
निवेश
अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिये धनोपार्जन आदि क्षेत्रों में निवेश करते रहते हैं। शुद्ध विचारों का निवेश नहीं करेंगे तो शुद्ध का उत्पादन
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