Day: May 27, 2026

पुद्गल विपाकी

अगुरूलघु, उप/पर घात, रसादि, आतप, उद्योत, प्रत्येक/ साधारण, शुभ/ अशुभ, स्थिर/ अस्थिर आदि 62 प्रकृतियाँ पुद्गल विपाकी हैं। ऐसे चिंतन से रागद्वेष कम होता है

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समाधि

समाधि कब ? जब इंद्रियाँ शिथिल होने लगें पर मन में उत्साह बना रहे। उत्साह कैसे बनाये रखें/ बढ़ायें ? भगवान/ गुरुओं का जय-जयकार करके।

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मंगल आशीष

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