वृद्ध काँच के जार में रखी गोल्डफिश जैसे होते हैं।
हर एक की निगाह उन पर होती है। इसलिए उनको अपने आचरण के प्रति बहुत सावधान रहना चाहिए।

कमलकांत

वर्तमान के क्रियाकलाप मेरे व्यक्तित्व का सही से निर्धारण नहीं कर सकते।
मैं क्या नहीं कर पा रहा हूँ, वह सही निर्धारण करेगा।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

कत्ती* सूत भिगोकर लाई, बनिया ने मारी बट्टी**।
बनिया कहे मैंने कत्ती लूटी, कत्ती कहे मैंने बनिया।

प्रभात जैन की दादी जी

* चरखे पर सूत बनाने वाली। ** तराजू की डंडी मारना।

(संसार का स्वरूप ऐसा ही है। हर व्यक्ति एक दूसरे को धोखा देने में लगा है और धोखा देकर खुश हो रहा है। पर भूल जाता है कि वह भी धोखा खा रहा है, दूसरों के द्वारा या कल को कर्मों के द्वारा धोखा खाना पड़ेगा ही)।

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