गंगाजल याचना की अंजुली में ही आता है,
अहंकार की मुठ्ठी तो खाली ही रहती है ।
इंग्लैंड में चाय पीते समय एक ब्रिटिश ने स्वामी विवेकानंद से कहा……
“सभी लोग कप से चाय पी रहे हैं और आप असभ्य की तरह प्लेट से पी रहे हैं”
स्वामीजी ने बहुत सुंदर जवाब दिया……
“इस समय यदि कोई और आ जाय तो आप की चाय झूंटी हो चुकी है, आप किसी से बांट नहीं सकते,पर मेरी चाय जो कप में है वो झूंटी नहीं है। मैं चाय के लिये उससे आग्रह कर सकता हूँ”
ये हमारी भारतीय सभ्यता हैं ।
(अन्जना-शिवपुरी)
भिखारी थोड़े पैसे माँगता है, पर वह भी नहीं मिलते ।
भक्त बिना माँगे ही, मालामाल हो जाता है ।
आवश्यक के प्रति आकर्षण भी लोभ है ।
मुनि श्री कुंथुसागर जी
Success is how high you bounce when you hit bottom.
सभी कार्य कर्म नहीं, यश और फल की कामना से किया गया “कार्य” है ।
निष्काम कार्य ही “कर्म” है ।
जिंदगी भर “सुख” कमाकर दरवाजे से घर में लाने की कोशिश करते रहे।
पता ही ना चला कि कब खिड़कियों से “उम्र” निकल गई !!
(अरुणा)
दंड़ भी एक दया है ,
अपराधी और समाज के प्रति कर्तव्य है ।
संभाल के रखना अपनी पीठ को ,
शाबाशी हो या ख़ंजर दोनों के निशान पीठ पर ही मिलते हैं ।
(डा.पी.एन.जैन)
We all are born Genius,
company makes us idiots.
जैसे गधों की संगती में रहकर शेर भी गधों जैसा व्यवहार करने लगता है ।
मनुष्य का स्वभाव –
आधा सुनना,
चौथाई समझना,
शून्य पर चिंतन करना,
पर प्रतिक्रिया दुगनी करना ।
(अरुणा)
छल का आशय यदि धर्म हो, तो छल भी धर्म बन जाता है ।
(जैसे माँ बच्चे की सेहत का ख्याल करके लड़्ड़ू छुपा देती है )
The purpose of relation is not to have someone who may be with you completely
But To have someone with whom you can share Your incompleteness completely..
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