A good and difficult GOAL is like a strenuous exercise,
it makes you stretch and strong.
मैं नमक की तरह हूँ ।
जो जरुरी तो है,
मगर जरुरत से ज्यादा हो तो
जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता हूँ ।
मैं बोलता नहीं….
मगर
सबकी बोलती बंद करवा सकता हूँ ।
आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ ।
मगर
मैं आपके पास हूँ, तो सब आपके हैं ।
मैं कुछ भी नहीं हूँ, मगर मैं निर्धारित करता हूँ ।
कि लोग आपको कितनी इज्जत देते हैं ।
मैं सारे फसाद की जड़ हूँ ।
मगर
फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतने पागल हैं !
मुझे पसंद करो
सिर्फ इस हद तक कि
लोग आपको नापसन्द न करने लगें ।
मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते ।
मगर जीते जी मैं आपको
बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ।
क्योंकि मैं वैभव (धन, दौलत, शौहरत, ऎश्वर्य ) हूँ ।।
(धर्मेंद्र)
Look for someone to make him happy,
and happiness will find you.
गुरु/भगवान के दरबार में “द” शब्द वाली वस्तु “स” शब्द में बहुत ही जल्दी बदलती है..
जैसे दुःख बदल जाता है, सुख में;
दुविधा बदल जाती है, सुविधा में;
दुर्गुण बदल जाते हैं, सद्गुण में;
दुर्बलता बदल जाती है, सबलता में;
दरिद्रता बदल जाती है, संपन्नता में;
दुर्विचार बदल जाते हैं, सद्विचार में;
दुर्व्यवहार बदल जाता है, सद्व्यवहार में;
दुष्परिणाम बदल जाते हैं, सद्परिणाम में;
दुराचार बदल जाता है, सदाचार में;
दाग बदल जाते हैं, साख में;
दुर्भावना बदल जाती है, सद्भावना में ।
(धर्मेंद्र)
गाँव छोड़कर शहर आये एक व्यक्ति ने क्या खूब लिखा है …
“गाँव छोड़ के शहर आया था
फिक्र वहां भी थी, फ़िक्र यहां भी है।
वहां तो सिर्फ ‘फसलें’ ही खतरे में थीं,
यहां तो पूरी ‘नस्लें’ ही खतरे में हैं ….
(धर्मेंद्र)
From word “HABIT” ,
if “H” is deleted , still “A BIT” is left ,
“A” is also dropped , “BIT” remains .
Lot of efforts are required to change any HABIT completely.
झाड़ू, जब तक एक सूत्र में बँधी होती है, तब तक वह “कचरा” साफ करती है।
लेकिन वही झाड़ू जब बिखर जाती है तो खुद कचरा हो जाती है।
(ब्र.संजय)
Those who had coins, enjoyed the rains,
those who had notes, were busy looking for shelter.
(Toshita)
तुम किस किस को हटाओगे ?
किस किस को घर से निकालोगे ?
इसलिये,
स्वयं निकल जाओ ।
स्वयं हटना बहुत सरल है,
इसीलिये, साधु संसार को नहीं हटाता, स्वयं हट जाता है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
वक़्त आपका है
चाहे तो सोना बना लो
और
चाहे तो सोने में गुज़ार दो…!
Well wishers are like beautiful Street Lamps,
they can not make the distance shorter,
but they can Lighten your path & make the Journey convenient.
(Mr. Deepak Jaiswal – Gwalior)
सोने की मूर्ति, सोने के टुकड़ों को तपा कर ही बनती है, पीतल से नहीं ।
जैसा भविष्य चाहते हो, वैसे काम करना शुरू कर दो।
चिंतन
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