Category: अगला-कदम
अनशन
अनशन 9 प्रकार से किया जाता है…. मन के द्वारा, वचन के द्वारा, काय के द्वारा और तीनों ही तीनों प्रकार से कृत, कारित, अनुमोदना
तैयारी
घर से पर-घर जाने के लिए अच्छे कपड़े पहनते हैं। गाँव से पर-गाँव जाने के लिए तैयारी और ज्यादा, धन आदि रखना होता है। देश
दु;ख में भगवान
तीव्र मिथ्यादृष्टि दु:ख में भी धर्म से दूर रहता है जैसे बीमारी में कोई डॉक्टर से दूर भागता हो या बच्चे इंजेक्शन से यह समझें
स्वरूप / लक्षण
स्वरूप त्रैकालिक। जीव का स्वरूप – स्वाभाविक → मूर्तिक/ अमूर्तिक, संकोच/ विस्तार वाला। वैभाविक → परिणमन के साथ। लक्षण → उपयोगो लक्षणम्। लक्षण जो स्वरूप
सम्यग्दर्शन
सम्यग्दर्शन अकेला भी हो सकता है यदि अक्षर श्रुत ज्ञानावरण कर्म का क्षयोपशम ना हो तो। आचार्य श्री विद्यासागरजी (भगवती आराधना भाग 1,गाथा 3,पेज 42) स्वाध्याय
शुद्धोपयोग
श्री समयसार जी/ प्रवचनसार जी के अनुसार चौथे गुणस्थान में शुद्धोपयोग नहीं होता है। श्रावकों को तो पर-द्रव्य के निमित्त से ही धर्मध्यान हो सकता
निधत्ति / निकाचित
एक मत के अनुसार कर्मों के निधत्ति और निकाचित गुण देवदर्शन से समाप्त हो जाते हैं; दूसरे मत के अनुसार आठवें गुणस्थान में। वस्तुत: यह
संबंध
दो प्रकार का संबंध – 1. संयोग द्रव्य – द्रव्य साथ रहकर एक दूसरे को प्रभावित करते हैं जैसे दूध और पानी। 2. समवाय द्रव्य
नित्य
हर पदार्थ में उत्पाद/ व्यय हो रहा है तो नित्य कैसे ? क्योंकि हर पदार्थ में – “यह वही है” बना रहता है। यही ध्रौव्यगुण/
सम्यग्दर्शन
तत्वों के अर्थ तो अलग-अलग ले सकते/ लिये जाते हैं। इसलिये प्रयोजनभूत तत्वों के सम्यक् अर्थ पर श्रद्धान से सम्यग्दर्शन कहा है। मुनि श्री मंगल
Recent Comments