Category: वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर

उत्तम सत्य धर्म

सत्य कभी कड़ुवा होता ही नहीं, बड़ी अजीब बात है !!  अभी तक तो हम सुनते आ रहे हैं कि सत्य कड़ुवा होता है । जब

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नीति/अनीति

नीति से चपरासी बनना भी मंज़ूर होना चाहिए, अनीति के साथ चक्रवर्ती बनना भी उचित नहीं । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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नाव

जो नाव मुझे उस पार ले जायेगी, एक दिन, उस पार पहुंचकर, उसे भी छोड़ना होगा । ये जानते हुये भी, मन नाव से कितना

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संस्कृति

संस्कृति वह है जो संस्कारित करे । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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धनतेरस

धनतेरस को जैन आगम में धन्य-तेरस या ध्यान-तेरस भी कहते हैं । भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग

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परपीड़ा

हमें मालूम ना था कि आग इतनी गरम होती है, पता तब चला जब हमारा खुद का घर जला । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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विज्ञान

सत्य की खोज में किये गये effort का नाम विज्ञान है । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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मोक्षमार्ग

समता की साधना और चारित्र की पवित्रता ही मोक्षमार्ग को प्रशस्त करती है । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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परोपकार

मशाल बनें, जो स्वंय प्रकाशित होती है तथा दूसरों को भी प्रकाशित करती है । कम से कम, गीली लकड़ी ना बनें जो खुद भी

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श्रद्धा

श्रद्धा बेशक और बेतर्क होनी चाहिये, श्रद्धा की ज्योति अपनी ही सांसों से बुझती है, अहंकार से श्रद्धा गिर जाती है, अहंकार और स्वाभिमान छोड़कर,

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मंगल आशीष

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