Category: अगला-कदम

अनंतानुबंधी कषाय

अनंतानुबंधी कषाय दुमुखी है – सम्यक्त्व व चारित्र दौनों को सांप की तरह दौनों मुँह से खाती है । मुनि श्री आर्जवसागर जी

Read More »

नाड़ी

लोक नाड़ी – 14 राजू ऊँची होती है । त्रस नाड़ी – 13 राजू – 60 योजन ( 3 वातवलय X 20 योजन) राजू |

Read More »

संयमासंयम

संयमासंयम वालों में बहुभाग तिर्यंचों का होता है । आचार्य श्री विद्यासागर जी (श्री आर्जव सागर जी )

Read More »

द्वितीयोपशम सम्यग्दर्शन

द्वितीयोपशम से उतरते समय यदि मिथ्यादर्शन उदय में आ जाये तो सीधे पहले गुणस्थान में आ जाते हैं, अनंतानुबंधी में बाद में जाते हैं ।

Read More »

अरिहंत भगवान

अरिहंत भगवान आहारक भी और अनाहारक भी होते हैं । जैसे Retirement से थोड़ा पहले अपने मकान की Maintenance बंद कर देते हैं, ऐसे ही

Read More »

सत्त्व

जिसकी सत्ता पाई जाती है, उसे सत्त्व कहते हैं । कर्मकांड़ गाथा : – 342

Read More »

उपशम

उदय, उदीरणा, उत्कर्षण, अपकर्षण, परप्रकृति-संक्रमण, स्थिति-कांड़क घात, अनुभाग-कांड़क घात के बिना ही कर्मों के सत्ता में रहने को उपशम कहते हैं । कर्मकांड़ गाथा :

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

March 27, 2010

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031