Category: अगला-कदम
लेश्या
जो कर्मों से आत्मा को लिप्त करती है । सयोग-केवली, के शुक्ल लेश्या होती है क्योंकि उनके साता कर्म का बंध होता रहता है, हालांकि
मध्यलोक
लोक की 14 राजू ऊंचाई में से 7 राजू अधोलोक, 7 राजू ऊर्धलोक, तो मध्यलोक कितना ? मध्यलोक 1 लाख चालीस योजन ऊंचा है ।
केवली
समवसरण में जो केवली आते हैं वे तीर्थंकरों को नमोस्तु नहीं किया करते हैं, क्योंकि उनके मोहनीय कर्म समाप्त हो चुका होता है । जिज्ञासा
तीर्थंकर
तीर्थंकर के अवधिज्ञान जन्म से होता है । विदेह क्षेत्र में दो और तीन कल्याणक वाले तीर्थंकरों के तीर्थंकर-प्रकृति बंधने के समय से होता है
निगोदिया की आयु
स्वांस का 1/18 भाग ( जिसमें निगोदिया एक बार जीता और एक बार मरता है ) आज के 1 सेकेंड़ के 1/24 वें भाग के
अघातिया कर्म
अघातिया कर्मों से बाह्य सामाग्री की प्राप्ति होती है । कर्म जड़ हैं, बलहीन हैं तो बाह्य सामाग्री इनसे कैसे मिलती है ? कर्मोदय तो
उदय/सत्ता/उदीरणा
आचार्य श्री विद्यासागर जी के अनुसार – आठों कर्मों का दसवें गुणस्थान तक उदय, सत्ता और उदीरणा चलती रहती है । यह नियम है, अन्यथा
सुक्ष्म जीव
सुक्ष्म जीव सांस लेने में कौन से जीवों को ग्रहण करते होंगे ? बादर वायुकायिक या वायु को सांस में ग्रहण करते हैं । 12 वें
उपशम श्रेणी
उपशम श्रेणी में उत्कृष्ट 4 बार ही जीव जायेगा, फिर क्षपक श्रेणी होता हुआ मोक्ष चला जायेगा ।
नरक में लेश्या
नरक में आयुपर्यन्त अपनी अपनी लेश्या रहती है । स्वस्थान संक्रमण में हानि वृद्धि अन्तर्मुहूर्त बाद अपनी अपनी लेश्या में होता रहता है । कर्मकांड़
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