Category: डायरी

Analysis

ज्यादा Analysis करने से Paralysis हो जाती है ; करना ही है तो अंतरंग विकारों का करें, बाह्य परिस्थितियों का नहीं ।

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भक्त

जो संसार से विभक्त होकर, भगवान/गुरु के चरणों में समर्पण कर दे ।

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उत्साह

प्रसन्न रहना है तो हर काम उत्साह से करो । जो समाधि-मरण के प्रति भी उत्साह रखते हैं, वे ज़िंदगी भी उत्साह/प्रसन्नता पूर्वक जीते हैं

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राग

वीतराग धर्म कहता है – चोर (द्वेषादि) को नहीं, चोर की माँ (राग) को पकड़ो । डॉ.वीरसागर जी जैन

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भगवान का नाम

गाड़ी पकड़ी जाने पर किसी बड़े आदमी का नाम लेने पर पुलिस छोड़ देती है, ऐसे ही भगवान का नाम लेने पर कर्म छोड़ देते

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पाप

पाप को भूमि से भारी इसलिये कहा है क्योंकि पत्थर तो समुद्र की तलहटी तक ही जाता है पर पाप तो नरक/जन्मजन्मांतरों तक जाता है

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सफलता

सफलता वह… जिसमें असफल होने पर भी सफलता जैसा समता का भाव/संतुष्टि रहे ।

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मंगल आशीष

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