Category: डायरी

संसार / सुख

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का सर्वोत्तम विचार… “दर्पण में मुख और संसार में सुख, होता नहीं है, बस दिखता है” ( ब्र. निलेश भैया

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ताक-झांक

सब को शौक है, दरारों से झांकने का; दरवाजा खोल दो तो कोई हाल तक नहीं पूछता..! (सुरेश)

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ज़िन्दगी का हिसाब

ज़रा सी बात से मतलब बदल जाते हैं… उंगली उठे तो बेइज्ज़ती???????? अंगूठा उठे तो तारीफ़ ???????? और अंगूठे से उंगली मिले तो लाज़बाव???????? यही

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परोपकार

दीपक का जीवन इसलिए वंदनीय नहीं है कि वह जलता है, अपितु इसलिये वंदनीय है क्योंकि वह दूसरों के लिए जलता है, दूसरों से नहीं

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Doer

People like to think that they shape events, but in reality, it is the other way around.

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रिश्ते

रिश्तों को जेबों में नहीं हुज़ूर! दिलों में रखिए…. क्योंकि… वक़्त से शातिर कोई जेबक़तरा नहीं होता…. (सुरेश)

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मंगल आशीष

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