Category: डायरी

भारत

“भा” से भाव, “र” से राग, “त” से ताकत । जब कोई किसी को दास बनाता है, पहले उसका नाम बदलकर नया नाम रखता है,

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श्रद्धा

श्रद्धा के दो भेद – 1. भावानात्मक झुकाव – संसार व परमार्थ दोनों में । 2. प्रकट रूप को आदर्श मान हृदय में स्थापित, जिसे

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कारण / कार्य

बीमारी में कई बार कहा जाता है कि कारण पता नहीं लग रहा, उसे डॉक्टर की भाषा में Idiopathic(Idiot डॉक्टर, Pathic बीमार) कहते हैं ।

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धन / चरित्र

पुरानी कहावत है – “…….. चरित्र गया सब कुछ गया”, उल्टी इसलिये हो गयी क्योंकि हमने चरित्र के स्थान पर धन को ही सब कुछ

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अच्छे लोग

अच्छे लोगों की परीक्षा कभी न लीजिए, क्योंकि वे पारे की तरह होते हैं; जब आप उन पर चोट करते हैं तो वे टूटते नहीं

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नारियल

नारियल – कृतज्ञता का भी प्रतीक है । खारा पानी लेकर, मीठा पानी लौटाता है ।

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उपकार

ज़लेबी अपनी बहुत सारी उलझनों के बाबजूद सबको मिठास देती है ।

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धर्म में असफलता

धर्म में हमारी दाल क्यों नहीं गल रही ? क्योंकि हम अपनी दाल को गुनगुने पानी में पका रहे हैं । जरा सी गर्मी लगते

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अति

शरबत में अति का मीठा डालने पर उसका स्वाद खराब हो जाता है, नुकसान भी करता है ।

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मंगल आशीष

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