Category: डायरी

भोजन की पवित्रता

धर्म की शुरुआत चौके से होती है; इसीलिये पहले घर छोटे, चौके बड़े होते थे । प्राय: बीमारियों की जड़ अशुद्ध भोजन ही है ।

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आशीर्वाद

भगवान तो आशीर्वाद देते ही नहीं, गुरु देते हैं; पर प्रभाव तभी जब शिष्य की भक्ति में कशिश हो, तथा भक्ति/विश्वास के अनुपात में ही

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सोच

मंदिर/गुरुचरण/अनुकूल परिस्थितियों में सटीक, गुरुचरण से दूर हुये/विपरीत परिस्थितियों में सोच – सब चलता है । तो जीवन सुचारू रूप से कैसे चलेगा !!

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प्रलय

प्रलय विनाश नहीं करती, (गंदगी समाप्त करके) Major परिवर्तन करके, नया/जैसा का तैसा बनाने में निमित्त बनती है ।

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भाव

नाटक की परिभाषा – बिना भाव की क्रिया । क्या हम भी धार्मिक क्रियायें ऐसे ही तो नहीं कर रहे हैं ?

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कामना

कामना उतनी ही करो जितनी औकात हो (पुण्य हों) । मज़दूर ने ज़मींदार की शानदार घोड़ी देख, भगवान से ऐसी ही घोड़ी मांगी । तभी

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धर्मात्मा और निर्धनता

प्राय: धर्मात्मा निर्धन क्यों होते हैं ? समझदार माँयें बच्चों को उतना ही देती हैं जितने में उनका पालन हो सके, ताकि वे बिगड़ ना

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वक़्त

वक़्त अच्छा/बुरा नहीं होता, अच्छे/बुरे कर्मोदय को हम अच्छा/बुरा वक़्त कहने लगते हैं ।

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मंगल आशीष

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October 8, 2018

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