Category: डायरी
भाषा
हित, मित, संदेह रहित* होनी चाहिये । तत्वार्थसूत्र टीका – 202 *अति प्रशंसा वाली भाषा प्रिय तो लगती है, पर संदेह रहता है ।
दया / कृपा
गुरु शिष्यों पर/ डॉक्टर मरीज़ों पर दया नहीं, कृपा करते हैं । मुनि श्री विनिश्चयसागर जी
भक्ति
जब शक्ति अंदर है तो भक्ति का क्या Role ? भक्ति कुदाल है, जो अंदर की शक्ति को खोदकर बाहर निकालती है । भक्ति अंजुरी
साधु / श्रावक
जब तक साधु, तब तक श्रावक; साधु के ना रहने/उनको ना मानने पर मनुष्य तो रहेंगे पर साधुता रहित जैसे अनियंत्रित आणविक शक्ति ।
गुरु / शिष्य
गुरु ठोंकेगा पर, हाथ का सहारा देकर; शिष्य ठुकेगा, पर (अपने) हाथ का सहारा लेकर; किसी तीसरे का सहारा ले लिया तो बेसहारा हो जायेगा
भक्ति
भक्ति क्यों नहीं हो पाती ? क्योंकि हम पापों पर विश्वास करते हैं, पुण्य पर नहीं । श्री राम वनवास जाते समय प्रसन्न इसलिये थे
जाप में मन
जाप में मन इसलिये स्थिर नहीं रहता क्योंकि हम बाकी समय उसे तेजी से चलाते रहते हैं जैसे तेज पंखा देर में रुकता है ।
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