Category: डायरी
धनोपार्जन
धन से क्या क्या मिल सकता है, इस पर तो दृष्टि रहती है, पर धन आने से क्या क्या खो जाता है, इसका ध्यान नहीं
संतुलन
तेज चलने वाले वाहनों से धुँआ/धूल भी ज्यादा निकलती/उड़ती है, पेट्रोल भी अनुपात से ज्यादा खर्च होता है ।
बोल
शब्द का भी अपना एक स्वाद है, बोलने से पहले स्वयं चख लीजिये, अगर खुद को अच्छा नहीं लगे तो दूसरों को कैसे अच्छा लगेगा
माधुर्य / पुरुषार्थ
कृष्ण ने गोवर्धन एक ऊँगली से उठाया पर बांसुरी दो ऊँगली से ! जीवन में माधुर्य के लिये पुरुषार्थ से ज्यादा शक्ति चाहिये ।
भगवान का ज्ञान
क्या भगवान को TV/Mobile का ज्ञान नहीं था ? ज्ञान था । तो बताया क्यों नहीं ?? वे ऐसे उपकरणों के घातक परिणाम जानते थे,
सुधार
गुरुजन भगवान की महिमा बता बता कर थक गये पर सुधार नहीं हुआ, जब भक्तों की महिमा बताना शुरू किया तब बदलाव हुआ ।
पुण्य / पुरुषार्थ
पुण्य क्षमता देता है, पुरुषार्थ उस क्षमता को उपलब्धियों में परिवर्तित कर देता है ।
सच्चे/खोटे पर श्रद्धा
खोटे भगवान/गुरु पर श्रद्धा करने में कम दोष है, सच्चे भगवान/गुरु में खोट निकालने से ।
Wants
If you want to advance in life, make sure that your wants don’t advance.
विषय / विकार
विषय मेरे वश में हैं, त्यागे जा सकते हैं, विकार मेरे वश में नहीं, जागा जा सकता है ।
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