Category: डायरी

ईश्वरीय मदद

जीवन में जब भी हम ख़राब दौर से गुजरते हैं… तब मन में यह विचार ज़रूर आता है कि… परमात्मा मेरी परेशानी देखता क्यों नहीं

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प्रगति

अभी तो वर्णमाला के “क” (क्रोध. कामादि कर्म) से “ख” (‘ख़राब’ कर्म ‘खाली’ करने ) तक भी गमन नहीं हो पाया है । चिंतन

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निर्दोष दृष्टि

लोग मेरी कमियाँ बताते हैं तब मेरा भी मन करता है – मैं भी उनकी कमियाँ बताऊँ, पर बता नहीं पाता, क्योंकि मुझे उनमें कमियाँ

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परोपकार

निकलता है, हर सुबह एक नया सूरज; यह बताने के लिए कि उजाले बांट देने से उजाले कम नहीं होते ! ????????एकता????????

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धीरज

जब जल गंदा हो जाता है तो उसे हिलाते नहीं, शांत छोड़ देते हैं , धीरज रखते हैं……., गंदगी अपने आप नीचे बैठ जाती है….

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गुरु / देवदर्शन

डॉक्टर के पास दर्शनार्थी बनकर जाओगे तो इलाज नहीं हो पायेगा, शरणार्थी बनने पर ही लाभ होगा । ऐसे ही गुरु/भगवान के पास शरणार्थी बनकर

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चिंता / प्रसन्नता

विचारों/भावनाओं को नियंत्रित करना कठिन है, क्रियाओं को आसान । पर भावनायें और क्रियायें आपस में Connected रहती हैं । सो क्रियाओं में प्रसन्नता दर्शायें,

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मंगल आशीष

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