Category: डायरी
बंधन / सीमा
बंधन = स्वार्थ/मोह से निर्मित सीमा, संयम = स्व/पर कल्याणार्थ निर्मित सीमा ।
उद्देश्य
आपरेशन सफल, पर मरीज़ मर गया । धन कमाया, स्वयं मर गया (धन कमाते-कमाते)।
धर्म की राह
नदी जिन पत्थरों की सहायता से अपनी राह बनाती है, वे ही पत्थर उसकी राह में अवरोध पैदा करने लगें तो उनको तोड़ देती है
सुख,दु:ख और धर्म
दु:खी ना होना ही, सुखी होना है । सुखी रहना ही धर्म है । (धर्मेंद्र)
साधु
जिससे संसार प्रभावित हो, पर वह संसार से प्रभावित ना हो । (श्री तुषार भाई)
अन्तरंग
ट्रेन के सुरंग से निकलते समय उसमें अँधेरा हो जाता है, कामकाज ठप । पर अंदर की Light जला लो तो डर काहे का !
मृत्यु
मृत्यु का क्षण तो निश्चित नहीं, पर मृत्यु किसी भी क्षण हो सकती है, यह निश्चित है ।
सार्थकता
प्रत्येक दिन की सार्थकता इसमें नहीं कि क्या पाया/कौन सी/कैसी फ़सल काटी, बल्कि इसमें है कि तुमने कितने और कैसे बीज बोये ।
पराश्रित
छत्र दिखने में तो अच्छा लगता है, पर ऊपर उठने में रूकावट ड़ालता है ।
पुरुषार्थ / भाग्य
अच्छा काम पुरुषार्थ से, लोगों के द्वारा उस काम को अच्छा मानना भाग्य ।
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