Category: डायरी

सत्य धर्म

कहते हैं “सत्य कड़वा होता है”, पर वास्तविकता यह है कि सत्य कड़वा हो ही नहीं सकता । यदि कड़वा होता तो भगवान तो सदैव

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शौच धर्म

पवित्रता, जो लोभ के अभाव में/संतोष से आती है, और शरीर की पवित्रता, गुणों से/तप से आती है । 2) एक कंजूस सेठ गड्ढ़े में गिर

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मार्दव धर्म

“म”  से मान का “द” से दमन, “व” से विनम्रता द्वारा । 2) मार्दव धर्म का प्रारम्भ होगा… भगवान के सम्मान / गुणगान से, फिर गुरु

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लोग क्या कहेंगे !

पूरी जिंदगी हम इसी बात में गुजार देते हैं कि……. “चार लोग क्या कहेंगे”, और अंत में चार लोग बस यही कहते हैं कि…. “अरिहंत

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उतावली

असफलता का एक कारण – छलाँग लगाते समय घोड़े की लगाम को खींच लेना । (सुरेश)

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बुराई / नेकी

“बुराई ” करना रोमिंग की तरह है, बोलो तो भी चार्ज लगता है और सुनो तो भी । “नेकी” करना LIC की तरह है, ज़िंदगी

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पर्यावरण

मेरी चिता सजाने के लिए, इन पेड़ों को मत काटो…. यदि अगला जन्म पक्षियों का मिला, तो घोंसला कहाँ बनाऊँगा । (धर्मेंद्र)

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आचरण

स्वर्ण कितना भी मूल्यवान क्यों ना हो, किन्तु सुगंधि पुष्प से ही आती है । हालाँकि श्रृंगार के लिये दोनों का ही महत्त्व है । इसी

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मंगल आशीष

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