Category: डायरी

अपना

कोयल अपनी भाषा बोलती है इसलिये आज़ाद रहती है । किंतु तोता दूसरे कि भाषा बोलता है इसलिए पिंजरे में जीवन भर गुलाम रहता है। अपनी

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मोह

हम मोह में दरख़्तों की तरह हैं… जहाँ लग जायें वहीं मुद्दतों खड़े रहते हैं… (अरविंद) बिना ये परवाह किये कि वहाँ हमारे हिस्से का

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Stress

Stress is the Gap between our Expectations & Reality. More Gap, More the Stress. So Expect less & Accept more. Result… Less gap, Less Stress.

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कुरीतियाँ

जो ताला चाबी को एक ओर घुमाने से बन्द होता है, वही दूसरी और घुमाने से खुल भी जाता है। हम अपने विचार, वाणी और

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अज्ञान

पतंग को मालूम तो है कि उसका जीवन छोटा सा है, कब समाप्त हो जायेगा यह भी ज्ञात नहीं ! अंत कचरे के ड़िब्बे में ही

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गुरु का महत्त्व

स्याही की भी मंज़िल का अंदाज़ देखिये…. खुद-ब-खुद बिखरती है, तो दाग़ बनाती है । जब कोई बिखेरता है, तो अलफ़ाज़…बनाती है ! (अरुणा)

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अच्छा

अच्छे व्यत्ति की तलाश छोड़, खुद को अच्छा बनायें; ताकि बहुत से व्यत्तियों की तलाश पूरी हो जाये ।

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मुसीबतें

तूफानों में पेड़ों की जड़ें गहरी और मज़बूत हो जाती  हैं ।

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मंगल आशीष

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