Category: डायरी

घड़ी

घड़ी की टिक-टिक को मामूली न समझो ! बस यूँ समझ लीजिये… ” ज़िंदगी ” के पेड़ पर ये समय रूपी कुल्हाड़ी के वार हैं

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प्रयास

बारिश की बूँदें, भले ही छोटी हों, लेकिन उनका लगातार बरसना बड़ी बड़ी नदियों का बहाव बन जाता है. ऎसे ही हमारे छोटे छोटे और

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पूजा / सेवा

पूजा श्रद्धा का विषय है, सेवा संवेदना का । श्रद्धा के साथ संवेदना और प्रबल व श्रेष्ठ हो जाती है ।

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दान

लौकिक दान जीवन निर्वाह के लिये । अलौकिक, जीवन निर्माण के लिये ।

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सम्पदा

सम से सम्पदा बना, यानि अपने और दूसरों के माध्यम से अर्जित की जाती है । अत: इसका उपयोग भी दोनों के लिये होना चाहिये

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चिंतन

किस रूप का चिंतन करें ? अपने उस रूप का, जो तुम किसी के सामने प्रस्तुत नहीं करते हो/बिना मुखौटे वाला ।

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विड़म्बना

इंसान भी कैसा अजीव है …! जीते समय सोचता है कि कभी मरुँगा नहीं, मरते समय लगता है जैसे कभी जीया ही नहीं । (सुरेश)

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होली

1) हो-ली…जो बीत गयी सो बात गयी। 2) हो-ली…मैं धर्म की हो-ली। 3) Holy…Purity. (Neelam)

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मंगल आशीष

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